लिखूंगा जरूर
मै कुछ लिखना चाहता हूँ कुछ ऐसा लिखना चाहता हूँ कि पाखंडियो के चेहरों से नकाब उतर जाये लोग देखते ही ...
Dr. Subhash Rai द्वारा 23 जुलाई, 2010 4:55:00 PM IST पर पोस्टेड
गुस्साया सूरज
सुबह का सूरज अच्छा लगता है लाल गुब्बारे की तरह आसमान में उठता हुआ अपनी मीठी रोशनी में डुबोता पेड़ों ...
Dr. Subhash Rai द्वारा 29 मई, 2010 1:19:00 PM IST पर पोस्टेड
चरैवेति
अंधेरा बहुत गहरा हो तो समझना सुबह क़रीब है लड़ना नहीं तमस से अपनी शक्ति जाया मत करना शून्य में ...
Dr. Subhash Rai द्वारा 20 मई, 2010 2:34:00 PM IST पर पोस्टेड
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ओ बादल
जलते अधरों पर गिरीं बूंदें तो छन्न-छन्न कर उड़ गयीं पल भर में इन्तजार में दहक रहा था मन तन से उठ ...
Dr. Subhash Rai द्वारा 4 जुलाई, 2010 4:50:00 PM IST पर पोस्टेड
काल
काल न बीतता है न छीजता है न चलता है न ठहरता है न जीता है न मरता है वह था,है और होगा के विभाजन में ...
Dr. Subhash Rai द्वारा 14 मई, 2010 6:13:00 PM IST पर पोस्टेड
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